09 नवंबर 2013

डा० जगदीश व्योम Dr. Jgdish Vyom

धूप गौरैया
उतरती छज्जे से
आँगन बीच

sparrow sun –
alights from the ledge
into the courtyard

***

अनाम गंध
बिखेर रही हवा
धान के खेत

the breeze
spreads a nameless scent -
paddy fields

***


सीली दीवार
सारी रात महकी
अम्मा की याद

damp walls -
fragrant through the night
memories of amma

                  ---- amma – mother

***



नन्हें वल्बों में
गुम हो गया दिया
तैल-गंध भी

lost amongst
the tiny lights, clay lamps
smell of oil too

***


उगने लगे
कंकरीट के वन
उदास मन

concrete jungles
sprouting everywhere
doleful soul

***


मोंगरा फूला
तैर गये सपने
खुली आँखों में

mogra blossoms
how gently, dreams float
in open eyes

***


टहनी हिला
जाने क्या बतियाते
जंगली पेड़

waving branches
who knows what they talk
… these wild trees

***

रात सिसकी
दूब ने सजा लिये
सफेद मोती

sighing night
the doob-grass dresses up
in white pearls

***

युगों से खड़े
ऋषि बरगद जी
बने तपस्वी

since eons
the sage banyan, stands
like an ascetic
***

-डा० जगदीश व्योम
Dr. Jgdish Vyom

07 अक्तूबर 2013

पत्ता क्या टूटा

पत्ता क्या टूटा ...
दूध के आँसू बहा
सिसका पेड़

-डा० जगदीश व्योम

हाइकु हंस

हाइकु हंस
हौले से हवा हुआ
काँपा शैवाल

-डा० जगदीश व्योम

मोंगरा फूला

मोंगरा फूला
तैर गये सपने
खुली आँखों में

-डा० जगदीश व्योम

धूप गौरैया

धूप गौरैया
उतरती छज्जे से
आँगन बीच

-डा० जगदीश व्योम

क्यों तू उदास

क्यों तू उदास
दूब अभी है जिन्दा
पिक कूकेगा

-डा० जगदीश व्योम

कुछ कम हो

कुछ कम हो
शायद ये कुहासा
यही प्रत्याशा

-डा० जगदीश व्योम

इर्द-गिर्द हैं

इर्द-गिर्द हैं
साँसों वाली मशीने
इंसान कहाँ

-डा० जगदीश व्योम

अनाम गंध

अनाम गंध
बिखेर रही हवा
धान के खेत

-डा० जगदीश व्योम

सीली दीवार

सीली दीवार
सारी रात महकी
अम्मा की याद

-डा० जगदीश व्योम

ओस की बूँद

ओस की बूँद
कैक्टस पर बैठी
शूली पे सन्त

-डा० जगदीश व्योम

टहनी हिला

टहनी हिला
जाने क्या बतियाते
जंगली पेड़

-डा० जगदीश व्योम

नन्हें वल्बों में

नन्हें वल्बों में
गुम हो गया दिया
तैल-गंध भी

-डा० जगदीश व्योम

रात सिसकी

रात सिसकी
दूब ने सजा लिये
सफेद मोती

-डा० जगदीश व्योम

चम्पा बाँटता

चम्पा बाँटता
गंध के अलगोझे
बजाती हवा

-डा० जगदीश व्योम

छिड़ा जो युद्ध

छिड़ा जो युद्ध
रोयेगी मानवता
हँसेंगे गिद्ध

-डा० जगदीश व्योम

वर्षा के दिन

वर्षा के दिन
छतरी ले, आ गये
सेम के बच्चे

-डा० जगदीश व्योम

05 अप्रैल 2012

गन्ध के बोरे

गन्ध के बोरे
लाता है ढो-ढोकर
हवा का घोड़ा।


-डा० जगदीश व्योम

युगों से खड़े

युगों से खड़े
ऋषि बरगद जी
बने तपस्वी।


-डा० जगदीश व्योम

साँझ होते ही

साँझ होते ही
बैठता आसन पे
ऋषि सूरज।


-डा० जगदीश व्योम

गुस्सैल नभ

गुस्सैल नभ
दिखाता लाल आँखें
रोता बादल।


-डा० जगदीश व्योम

रोज ले आती

रोज ले आती
गौरैया घास-फूस
फेंक देती माँ।


-डा० जगदीश व्योम

पीटता नभ

पीटता नभ
बिजली के कोढ़े से
रोता बादल।


-डा० जगदीश व्योम

खेत की मेड़

खेत की मेड़
सिसके चुपचाप
छिला वदन।


-डा० जगदीश व्योम

गौरैया आती

गौरैया आती
सिखाती कितनों को
अन्दाज़ नया।


-डा० जगदीश व्योम

थका सूरज

थका सूरज
ढहा देगा फिर भी
तम का दुर्ग।


-डा० जगदीश व्योम

गोद में बैठा

गोद में बैठा
सूरज खरगोश
उछल भागा।


-डा० जगदीश व्योम

मुढ़ैठा बाँधे

मुढ़ैठा बाँधे
अकड़ा खड़ा चना
माटी का बेटा।


-डा० जगदीश व्योम

निगल गई

निगल गई
सदियों का सृजन
क्रोधित धरा।


-डा० जगदीश व्योम

बूढ़ा सूरज

बूढ़ा सूरज
झेलेगा कब तक
तम के दंश।


-डा० जगदीश व्योम

पतंग उड़ी

पतंग उड़ी
डोर कटी, बिछुड़ी
फिर न मिली।


-डा० जगदीश व्योम

यूँ ही न बहो

यूँ ही न बहो
पर्वत-सा ठहरो
मन की कहो।


-डा० जगदीश व्योम

मैं न बोलूँगा

मैं न बोलूँगा
बोलेंगी कविताएँ
व्यथा मन की।


-डा० जगदीश व्योम

सूर्य के पाँव

सूर्य के पाँव
चूमकर सो गए
गाँव के गाँव।


-डा० जगदीश व्योम

चींटी बने हो

चींटी बने हो
रौंदे तो जाओगे ही
रोना-धोना क्यों ?


-डा० जगदीश व्योम

बिना धूरी की

बिना धूरी की
घूम रही है चक्की
पिसेंगे सब।


-डा० जगदीश व्योम

मिलने भी दो

मिलने भी दो
राम और ईसा को
भिन्न हैं कहाँ।


-डा० जगदीश व्योम

मेघ उमड़े

मेघ उमड़े
धरती भी उमगी
फसल उगी।


-डा० जगदीश व्योम

सहम गई

सहम गई
फुदकती गौरैया
शुभ नहीं ये।


-डा० जगदीश व्योम

मरने न दो

मरने न दो
परंपराएँ कभी
बचोगे तभी।


-डा० जगदीश व्योम

नहीं पनपा

नहीं पनपा
बरगदी छाँव में
कभी पादप।

-डा० जगदीश व्योम

उगने लगे

उगने लगे
कंकरीट के वन
उदास मन।

-डा० जगदीश व्योम

धूप के पाँव

धूप के पाँव
थके अनमने से
बैठे सहमे।

-डा० जगदीश व्योम

ताप से जूझा

ताप से जूझा
पा गया सुर्ख रंग
टीले का टेसू ।

-डा० जगदीश व्योम

20 मई 2011